IPL 10 : मिलिए क्रिकेट के वॉररूम से, यहां है सबकी कुंडली

Moving the IPL Festival in the country. The tournament is made players out of all the strategies of winning team in dugout. In fact, the place near the dugout boundary line, where the match analyst sits with the laptop. These analysts players standing on the boundary during the match live consistently '' message ''.


नई दिल्ली : देश में इस समय आईपीएल उत्सव चल रहा है. इस टूर्नामेंट में खिलाड़ियों को आउट करने की, टीम की विजय की सारी रणनीतियां डगआउट में बनाई जाती है. वास्तव में डगआउट बाउंड्री लाइन के पास की वह जगह होती है, जहां मैच के विश्लेषक लैपटॉप के साथ बैठते हैं. ये विश्लेषक मैच के दौरान भी बाउंड्री पर खड़े खिलाड़ियों को लगातार ''मैसेज'' देते रहते हैं. 
इस तरह ये अपनी रणनीति को  ज्यादा बेहतर ढंग से लागू कर पाते हैं. यह भी गौरतलब है कि आईपीएल में पवेलियन जैसी कोई चीज नहीं होती. बाउंड्री लाइन के पास डगआउट रूपी अस्थाई पवेलियन बना होता हैं, जहां से सारी रणनीति मैदान तक पहुंचाई जाती है. 
आरसीबी और राइजिंग पुणे सुपरजाइंट्स के मैच को याद कीजिए. डगआउट से आवाज आती है, ''ये क्या कर रहे हो, एबी डीविलियर्स को गुगली फेंक रहे हो? लेग ब्रेक डालो.''  डगआउट से सबस्टीट्यूट मयंक अग्रवाल यह संदेश इमरान ताहिर तक पहुंचाते हैं. चिन्नास्वामी स्टेडियम पर दक्षिण अफ्रीकी स्पिनर डीविलियर्स को अब तक छह गेंदे फेंक चुका था और इन गेंदों पर डीविलियर्स ने 12 रन बनाए थे. इन छह गेंदों में से पांच गेंदें या तो गुगली थी या स्लाइडर्स. ये गेंदें डीविलियर्स को रन बनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही थीं. 
डगआउट से आई आवाज पर उड़ा डीविलियर्स का स्टंप 
डीविलियर्स को ऑफ स्टंप पर लूपी लेग ब्रेक डाली जाए, यह रणनीति थी. दो गेंद बाद ही ताहिर ने ऐसी ही गेंद डाली और एमएस धोनी ने डीविलियर्स को स्टंप आउट कर दिया. ताहिर ने डगाउट की उनकी रणनीति को सही ढंग से अप्लाई करने के लिए हाथ उठाकर इशारा किया. 
ऐसा नहीं है कि डगआउट रणनीति को केवल गेंदबाज ही एक्जीक्यूट कर रहे हैं. एक मैच बाद ही दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर मनीष पांडे अमित मिश्रा का सामना कर रहे थे. पहली तीन गेंदें (डॉट बाल, विकेट और सिंगल) हो चुकी थीं. मिश्रा ने ऑफ स्टंप के बार स्लो गुगली डाली. उनके पास और कोई विकल्प भी नहीं था. पांडे ने इस गेंद को आगे बढ़कर बॉउंड्री के बाहर भेज दिया. 
डगआउट से ही बताया गया मनीष पांडे को काउंटर अटैक 
दरअसल,  मनीष पांडे अमित मिश्रा का मन पढ़ चुके थे. पांडे को यही बताया गया था कि अमित इस तरह की गेंद डालेंगे और काउंटर रणनीति में पांडे ने मिश्रा को मात दे दी. आईपीएल क्रिकेटर्स के पास इस बात का मौका नहीं होता कि वे किसी रणनीति पर दोबारा सोचें. ऐसा भी नहीं है कि टी-20 की अपनी अनिश्चितताएं या भव्यताएं ना हों, लेकिन साढ़े तीन घंटे के एक मैच में कुछ भी प्रीडिक्ट नहीं किया जा सकता. 
क्रिकेट विशेषज्ञों के लिए कोई अपरिचित या अजनबी खेल नहीं है. सभी स्तरों पर हर उम्र की किक्रेट टीमों के पास आजकल ''लैपटॉप'' है. प्रसन्ना अगोरम और सीकेएम धनंजय जैसे क्रिकेट रणनीतिकार आईपीएल फ्रेंचाइजी में अहम स्थान रखते हैं. दोनों अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफलता का स्वाद चख चुके हैं. वे जानते हैं कि क्रिकेट में उनकी भूमिका अब बहुत बदल गई है. प्रसन्ना कहते हैं, क्रिकेटर्स के वीडियो होना और पिच मैप होना ही काफी नहीं है. 
तेजी से रणनीति बनाता और बदलता है डगआउट
आजकल, रणनीति का मतलब केवल यही नहीं है कि आप कहें कि जोस बटलर स्पिन के सामने परेशान होते हैं, इसलिए उन्हें आउट करने के लिए स्पिनर को लगाया जाए. आप गेंदबाद को बहुत से विकल्प देने होंगे और ये विकल्प डाटा और रिसर्च पर आधारित होंगे. आपको यह बताना होगा कि बटलर पारी की शुरुआत में बाउंसर पर अटैक नहीं करता. आक्रामक होने से पहले वह कम से कम 15 गेंदें खेलता है, इसलिए यदि गेंदबार बटलर की बॉडी पर गेंद फेंके तब भी कोई समस्या नहीं है. आईपीएल के शुरुआती दौर में रणनीति बनाना उतना कठिन नहीं था. डगआउट सही अर्थों में रणनीति बनाता है, ऐसी रणनीति जो तत्काल बनाई जाती है और तत्काल चेंज भी हो जाती है.  
एक गेंदबाज जानना चाहता है कि मैच में जो 24 गेंदें उसे फेंकनी है, वे किस तरह की हों. उदाहरण के लिए, टेस्ट क्रिकेट में बल्लेबाज सैटल होने के लिए कम से 40 गेंदे खेलता है. जबकि टी 20 में महज 7-8 गेंदें. इसलिए गेंदबाज को पहली गेंद से पता होना चाहिए कि उसे क्या करना है. आईपीएल की पूरी तैयारी हर गेंद के हिसाब से की जाती है. आप एक जगह बैठ कर पूरे 20 ओवरों की रणनीति एक साथ नहीं बना सकते.
''ग्राउंड एनालिसिल, फील्ड सैटिंग जैसी बहुत सी चीजें होती हैं जिनसे आपकी रणनीति प्रभावित होती है. आपकी रणनीति को प्रभावित करने वाला असंख्य कारक मौजूद है.'' यह कहना है प्रसन्ना का, जो पिछले साल से पुणे के रणनीतिकार हैं. इससे पहले वह आरसीबी और दिल्ली डेयरडेविल्स के भी रणनीतिकार रहे हैं.  
धनंजय के मुताबिक, केवल कंप्यूटर ऑपरेट करना और खिलाड़ियों को रिप्ले दिखाना क्रिकेट विश्लेषण नहीं है. अब क्रिकेट विश्लेषण कला है और विज्ञान है. सूचना की ना जाना कितनी सतहें हैं, जिन्हें रणनीति और तकनीकी पक्षों के साथ देना होता है. 
जाहिर है टी-20 में विश्लेषक होना आसान नहीं है. जरा सी चूक आपकी पूरी प्रतिष्ठा को धूल में मिला सकती है. डग आउट में लिया गया एक भी गलत निर्णय पूरे मैच को बदल सकता है. यानी जो मैच ग्राउंड पर दर्शक देखते हैं, उसके समानांतर एक मैच डगआउट में भी खेला जा रहा होता है. इस बार जब आप मैच देखें तो इस पर गौर कीजिएगा.
source zee news

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