ईरान विजिट पर रवाना हुए मोदी, चाबहार पोर्ट पर डील कर पाक-चीन को देंगे जवाब

Narendra Modi on Iran visit from Sunday for multiple deals.

Narendra Modi

नई दिल्ली. नरेंद्र मोदी रविवार दोपहर ईरान की दो दिन की ऑफिशियल विजिट पर रवाना हो गए। इस विजिट के दौरान दोनों देशों में कई अहम डील्स हो सकती हैं। इनमें से सबसे खास चाबहार पोर्ट को लेकर होने वाली डील है। इस डील के बाद दोनों देशों के बीच कारोबार करना आसान हो जाएगा। चीन पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट का इस्तेमाल कर रहा है। अब भारत-ईरान के बीच चाबहार पोर्ट पर होने वाला करार दरअसल, पाकिस्तान और चीन को भारत का करारा जवाब ही माना जाएगा। चार महीने पहले ही ईरान पर से हटा है बैन....

- न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर इंटरनेशनल कम्युनिटी ने ईरान पर बैन लगाए थे। वर्ल्ड कम्युनिटी और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद इस बैन को हटाया गया है।
- भारत सरकार के एक अफसर का कहना है कि ईरान पर से बैन हटाए जाने के बाद कोशिश है कि भारत इस मौके का फायदा उठाए और ईरान से ट्रेड तेजी से बढ़ाया जाए। अफसर के मुताबिक, मोदी की ईरान विजिट बेहद कामयाब हो सकती है। इसके फायदे फ्यूचर में नजर आएंगे।
- भारत की कई बड़ी कंपनियां ईरान में आईटी और दूसरे सेक्टर में काम करना चाहती हैं। इस विजिट से इन कंपनियों को फायदा होगा।
चाबहार पोर्ट का मुद्दा सबसे अहम
- ईरान चाबहार पोर्ट को डेवलप करना चाहता है और भारत इसमें मदद को तैयार है। इसके फर्स्ट फेज के डेवलपमेंट के लिए दोनों देशों मे डील होने जा रही है।
- इसके अलावा ईरान को ऑयल सेक्टर में भी भारत मदद करने जा रहा है।
- चाबहार पोर्ट के तैयार हो जाने के बाद भारत और ईरान सीधे ट्रेड कर सकेंगे। भारतीय या ईरानी जहाजों को पाकिस्तान के रूट से नहीं जाना पड़ेगा। इस डील में अफगानिस्तान का भी अहम रोल होगा।
- रविवार की शाम तेहरान पहुंचने के बाद मोदी ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खमेनी और प्रेसिडेंट रोहानी से मिलेंगे।
चाबहार पोर्ट से क्या होगा हमें फायदा
- यह पोर्ट ट्रेड और स्ट्रैटेजिक लिहाज से भारत के लिए काफी अहम है। इसलिए कि सी रूट से होते हुए भारत के जहाज ईरान में दाखिल हो सकते हैं और इसके जरिए अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक के बाजार भारतीय कंपनियों और कारोबारियों के लिए खुल जाएंगे। यह जरूरी इसलिए भी है कि पाकिस्तान ने आज तक भारत के प्रोडक्ट्स को सीधे अफगानिस्तान और उससे आगे जाने की इजाजत नहीं दी है। इतना ही नहीं पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर तो एक तरह से चीन ने कब्जा ही कर लिया है।
- चाबहार पोर्ट खुल जाना पाकिस्तान और चीन को भारत का करारा जवाब होगा। वैसे तो यह डील 2015 में ही फाइनल हो गई थी, लेकिन बाद में कुछ दिक्कतें आ गईं थीं।
फरजाद गैस सेक्टर
- फारस की खाड़ी में ओएनजीसी की खोज वाले फरजाद-बी गैस क्षेत्र के डेवलपमेंट का अधिकार भी भारत लंबे समय से हासिल करना चाहता था। यह अब भारत को मिल भी गया है। दोनों देश अब इस पर आगे बढ़ सकते हैं। भारतीय ऑयल कंपनियों को इस स्कीम से काफी फायदा होगा।
चीन की भी ईरान पर नजर
- चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग जनवरी में ईरान गए थे। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि चीन ईरान और अमेरिका के बीच की दूरियों को फायदा अपने लिए उठाना चाहता है, लेकिन भारत इस मामले में आगे है। कल्चर के तौर पर भी भारत और ईरान काफी करीब हैं।
- मोदी को ईरान आने का न्योता खुद वहां के प्रेसिडेंट ने दिया है। ईरान रेलवे और आईटी सेक्टर में भारत से पहले ही मदद मांग चुका है।
- मोदी रविवार को यहां एक गुरुद्वारे में जाएंगे। यहां वह भारतीय सिखों से मुलाकात करेंगे। ईरान के बाद पीएम कतर भी जाएंगे।
Source: Bhaskar

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