ऐसे बेरहम थे अंग्रेज, विद्रोही राजा को दी थी फांसी, बेटियों को बनाया था वेश्या

Kranti Diwas story about Shah Inayat Ali of Gorakhpur

Basant Sarai in UP

गोरखपुर: 10 मई की तारीख भारतीय इतिहास में क्रांति दिवस के रूप में अंकित है। अंग्रेजों की बर्बरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां शाहपुर स्टेट के राजा शाह इनायत अली को फांसी देने के बाद उनकी बेटियों को वेश्या बना दिया गया था। आज आजादी की क्रांति की 169वीं जयंती पर हम आपको उसी घटना के बारे में बता रहे हैं। खूनी कुएं में दी गई थी इनायत अली को फांसी...
- गोरखपुर जिले के बसंतपुर स्थित मोती जेल वतन परस्त रखवालों की दास्तां अपने दामन में छुपाये हुए है।
- यहां वहीं खूनी कुआं और पाकड़ का पेड़ मौजूद हैं जिसमें सैकड़ों देशभक्तों को फांसी के फंदे पर चढ़ाया गया था।
- यहीं पर शाह इनायत अली को भी अंग्रेजों ने फांसी दी थी और उनकी दो बेटियों को बसंतपुर स्थित कोठे पर बैठा दिया था।
ऐसे हुई थी क्रांति की शुरुआत

- प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम आंदोलन मेरठ से 10 मई 1857 को शुरू हुआ था।
- इसके जनक धन सिंह गुर्जर रहे, जिनकी शहादत की प्रतिमा आज भी मेरठ कमिश्नरी के पास मौजूद है।
- धन सिंह गुर्जर ने 836 भारतीय कैदियों को छुडाकर सैन्य छावनी में आग लगवाकर क्रांति की शुरुआत की थी।
- अंग्रेजों ने गुर्जरों को न रोकने के जुर्म में इन्हें विद्रोही मानकर इन्हें फांसी के फंदे पर लटका दिया था।
इनायत अली ने ऐसे चखाया था अंग्रेजों को मजा
- जिस वक्त इस आंदोलन की शुरुआत हुई उस वक्त गोरखपुर एरिया के शाहपुर स्टेट के राजा शाह इनायत अली थे।
- आजमगढ़ के अतरौलिया से 11 अंग्रेज अफसर गोरखपुर की सीमा में आना चाहते थे।
- कमांडर एलिस ने सरयू नदी पार कराने के लिए शाह को मैसेज भेजकर नाव उपलब्ध करने को कहा था।
- शाह ने एक नाविक को अंग्रेज अफसरों को लाने के लिए भेजा तो सही, लेकिन साथ ही नाविक को नदी के बीचोबीच पहुंचने पर नाव डुबाने का निर्देश भी दिया।
- नाविक ने वैसा ही किया। 11 अफसरों को नदी में डूबने कर मौत हो गई।
- इस घटना पर गुस्साए अंग्रेजों ने शाह को 1857 में इस्लामी तारीख के मुताबिक 23 रजब को मोती जेल में फांसी दे दी।
- शाह के शव को उनके पूर्वज अब्दुल अजीज शाह की मजार के बगल में दफनाया गया।
बेटियों को बना दिया था वेश्या
- सोशल वर्कर डॉ पीके लाहिड़ी बताते हैं, "राजा शाह इनायत अली को आरोपी करार देते हुए मोती जेल में फांसी दी गई। मोती जेल कभी सतासी के राजा बसंत सिंह का महल था, जिसे ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1802 में तोप से उड़ा दिया था। बाद में इसे अंग्रेजों ने कोठा बना दिया था।"
- इतिहासकार डॉ दानपाल सिंह के अनुसार राजा शाह इनायत अली को फांसी देने के बाद अंग्रेजों ने उनकी दो बेटियों को कोठे पर बैठाकर वेश्या बना दिया था।
- अंग्रेजों द्वारा बनाया गया कोठा बसंत सराय के नाम से जाना जाता था, जो आज भी मौजूद है।
मोती जेल में दी गई क्रांतिवीरों को फांसी
- अंग्रेज आजादी की लड़ाई में शामिल क्रांतिकारियों को मोती जेल में कैद रखते थे।
- गोरखपुर के अधिकतर शहीदों को इसी जेल में फांसी दी गई।
- अंग्रेजों ने 1825 में जिला चिकित्सालय के नजदीक लॉकअप बनवाया था।
- अंग्रेजों ने 1893 में जिला कारागार बनवाया था।
- देशभक्ति के जज्बे से लबरेज इस जेल को राष्ट्रीय धरोहर के तौर पर सरंक्षित किए जाने की जरूरत है।
- इतिहासकार डॉ दानपाल सिंह ने श्रीनेत राजवंश (सतासीराज) के प्रथम खण्ड में इनायत अली शाह के बारे में लिखा है।
- पुरानी जेल या डोमखाना के नाम से मशहूर यह जेल खस्ताहाल हो चुकी है।
Source: Bhaskar
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