MYTH: यहां हुआ था परशुराम का जन्म, ये निशानियां देती हैं गवाही

Birth place of lord Parshuram. Lots of evidences found in Raipur.

Parshuram Birth Place

रायपुर/बैकुंठपुर: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में घने जंगलों के बीच स्थित कलचा गांव में स्थित एक ऑर्कियोलॉजिकल साइट है जिसे शतमहला कहा जाता है। मान्यता है कि जमदग्नि ऋषि की पत्नी रेणुका इसी महल में रहती थीं और भगवान परशुराम को जन्म दिया था। कलचा गांव देवगढ़ धाम से महज दो किलोमीटर दूर है और उस पूरे क्षेत्र में ऋषि-मुनियों के इतिहास से जुड़े कई अवशेष बिखरे पड़े हैं।
पौराणिक इतिहास में अपने गुस्से के लिए मशहूर और विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम की जयंती पर भास्कर.कॉम बता रहा है उनके बर्थप्लेस के बारे में...
- हरे-भरे जंगलों और पहाड़ों से घिरा छत्तीसगढ़ का सरगुजा क्षेत्र प्राचीन काल के दंडकारण्य का वह हिस्सा है जो नामी-गिरामी ऋषि-मुनियों की तपोस्थली हुआ करता था।
- इसे उस समय सुरगुंजा के नाम से जाना जाता था, वही बदलते-बदलते सरगुजा हो गया।
- सरगुजा डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर अंबिकापुर से लगभग 35 किलो मीटर दूर पर उदयपुर ब्लाॅक का एक पंचायत है देवटिकरा।
- देवटिकरा पंचायत स्थित देवगढ़ धाम को परशुराम के पिता जमदग्नि की तपोभूमि माना जाता है।
- इसके अलावा वहां मौजूद 12 ज्योतिर्लिंगों का पुराना मंदिर भी उस जगह की ऐतिहासिकता की पुष्टि करता है।
- देवगढ़ के बारे में यह भी मान्यता है कि अब से करीब दो हजार साल पहले कालिदास ने वहीं पर मेघदूतम नाटक लिखा था।
- कलचा गांव देवगढ़ धाम से पश्चिम की ओर महज दो किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
- देवगढ़ धाम के पुजारी अमृत कुमार वैष्णव का कहना है कि पूरे क्षेत्र में परशुराम और उनके माता-पिता से जुड़ी कहानियां और निशानियां मौजूद हैं।
- कोरिया जिले में पोस्टेड पुरातत्त्व विभाग के अधिकारी वाल्मीकि दुबे का भी कहना है कि यहां स्थानों के नाम और मिलने वाले अवशेषों से परशुराम के कनेक्शन की पुष्टि होती है।
Source: Bhaskar
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