केरल में मंदिर हादसे के बाद 41 परिवार पागलपन की कगार पर

Inside story after Kollam accident, state government have to work more to resolve the issue.

Kollam Tragedy

कोल्लम: केरल के कोल्लम स्थित पुत्तिंगल मंदिर हादसे में पटाखों में लगी आग ने 123 लोगों की जिंदगी छीन ली। पर उस खौफनाक मंजर ने 41 परिवार के लोगों को पागलपन की कगार तक पहुंचा दिया। सदमा इस कदर छाया है कि अब लोग चूल्हे की आग देखकर भी घरों के लोग बाहर भागने लगते हैं। बता दें कि बीते रविवार तड़के इस मंदिर में आतिशबाजी के दौरान पटाखा स्टोर में आग लगी थी। 113 लोगों की मौत हुई थी। 400 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। क्यों तैनात किए गए हैं मेडिकल ऑफिसर...
- अब बरतन भी गिरता है तो हादसे को करीब से देखने वाले लोग उसकी आवाज सुनकर चीख पड़ते हैं और रोने लगते हैं।
- आस-पास कोई शोर हो जाए या किसी गाड़ी की तेज लाइट ही पड़ जाए तो असहज हो जाते हैं।
- इन लोगों की हालत इतनी सीरियस है कि एडमिनिस्ट्रेशन ने पांच साइकायट्रिस्ट की एक टीम इस इलाके में तैनात कर दी है।
पागलपन की जद में 41 परिवार
- कोल्लम डिस्ट्रिक्ट के साइकायट्रिक डिपार्टमेंट के हेड डाॅ. रमेश चंद्रन अपने हाथ में ऐसे 41 परिवारों की लिस्ट लिए हुए हैं जिनका ट्रीटमेंट हो रहा है। उनकी लगातार काउंसलिंग की जा रही है।
- डॉ. चंद्रन कहते हैं- ''जो लोग गंभीर रूप से शॉक में हैं, यदि समय रहते उनका इलाज नहीं हुआ तो वे पागलपन की जद में जा सकते हैं।''
- ''अब भी सैकड़ों लोग ऐसे हैं जिनके जेहन पर हादसे का खौफनाक मंजर कायम है। यदि 15 दिनों से ज्याद वक्त तक वह मंजर उनकी आंखों के सामने घूमता रहा तो लोग और मेंटली बीमार हो सकते हैं।''
क्या कहती हैं मेडिकल ऑफिसर...
- इलाज के लिए कैंप में मौजूद अपर डिस्ट्रिक्ट मेडिकल ऑफिसर डाॅ. संध्या कहती हैं- ‘हादसे में घायलों या इससे प्रभावित छह हजार से ज्यादा लोगों को अब तक ट्रीटमेंट दिया जा चुका है।''
- ''जो बच गए पर इस हादसे को देखा या फिर जिन्होंने घायलों को अस्पताल पहुंचाया, क्षत-विक्षत शरीर में जान तलाशने में लगे रहे, उनमें से ज्यादातर अब डिप्रेशन में हैं।''
- ''या तो इनके परिवार के लोग इन्हें डाक्टरों के पास ले आ रहे हैं या मेडिकल टीम ऐसे लोगों की पहचानकर उनका इलाज करा रही है।''
घर-घर जाकर हो रही पहचान...
- साइकायट्रिस्ट टीम के काउंसलर डाॅ. महेश कुमार कहते हैं कि उनकी टीम घर-घर जाकर ऐसे लोगों की पहचान कर रही है जो इस घटना के बाद स्ट्रेस्ड हैं और बार-बार असहज हो रहे हैं।
- डॉ. महेश बताते हैं कि घटना के छह दिन बाद भी कई लोग इतने स्ट्रेस्ड हैं कि घर में चूल्हा जलता देख चीखते हुए घर से बाहर भागते हैं।
- ऐसी या इस तरह की घटना का पता चलते ही उनकी टीम फौरन उस घर में पहुंचती है और काउंसलिंग करती है।
- डाॅ. संध्या बताती हैं कि एक लड़की को इतना शॉक लगा है कि उसने खाना-पीना ही छोड़ दिया। उसे त्रिवेंद्रम रेफर किया गया है। ताकि उसका बेहतर इलाज किया जा सके।
- डाॅ. रमेश कहते हैं कि घटना के कुछ चश्मदीद दो-तीन तक सो ही नहीं पाए। उन्हे नींद नहीं आ रही। उन्हें सोने की दवा दी जा रही है।
इसलिए डॉक्टर कहते हैं- रोने दो इसे...
- केरल मंदिर हादसे में भाई को खो चुके अरविंद भी ऐसे ही एक कैम्प में हैं। उनसे पूछा तो वे बोलने के बदले रोने लगे।
- चुप कराने की कोशिश की तो डाॅक्टरों ने रोक दिया। कहा- इसे रोने दो।
- पांच मिनट रोने के बाद अरविंद ने बताया कि मेरा भाई मोबाइल से वीडियो बना रहा था कि धमाका हो गया।
- इसके बाद वो नहीं दिखा। सिर्फ मांस के कुछ टुकड़े ही दिखे।
- अरविंद के पैर में प्लास्टर देख पूछा कि क्या आपको भी चोट लगी थी? उसने कहा- पता नहीं।
Source: Bhaskar
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